जीवक आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर में धूमधाम से मनाई गई धन्वंतरि जयंती एवं शिष्योपनयन संस्कार
आज जीवक आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर में भगवान धन्वंतरि की जयंती के पावन अवसर पर धन्वंतरि जयंती एवं शिष्योपनयन संस्कार समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद की प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति एवं चिकित्सा शिक्षा के नैतिक मूल्यों को आगे बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. पारितोष मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), चंदौली तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. एस. के. सिंह, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (Additional CMO), चंदौली की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर महाविद्यालय के संरक्षक एवं पूर्व एमएलसी श्री शिवबोध राम जी भी उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. गोपाल दास गुप्ता जी एवं चेयरमैन डॉ. सुनील कुमार गौतम जी के करकमलों द्वारा नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का विधिवत शिष्योपनयन संस्कार संपन्न कराया गया तथा उन्हें मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया।
शिष्योपनयन संस्कार भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु के प्रति श्रद्धा, अनुशासन, समर्पण, सेवा एवं ज्ञानार्जन के संकल्प का प्रतीक है। यह संस्कार नवप्रवेशित विद्यार्थियों को केवल एक चिकित्सक बनने की दिशा ही नहीं दिखाता, बल्कि उन्हें एक संवेदनशील, सेवाभावी एवं नैतिक चिकित्सक बनने की प्रेरणा भी प्रदान करता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने भगवान धन्वंतरि को नमन करते हुए आयुर्वेद के महत्व, भारतीय चिकित्सा पद्धति की गौरवशाली परंपरा तथा समाज के स्वास्थ्य संरक्षण में आयुर्वेद चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को पूर्ण निष्ठा, अनुशासन एवं समर्पण के साथ चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने तथा भविष्य में मानव सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
महाविद्यालय के चेयरमैन डॉ. सुनील कुमार गौतम जी एवं प्राचार्य प्रो. गोपाल दास गुप्ता जी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए नवप्रवेशित विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, प्रकृति के साथ सामंजस्य एवं मानव कल्याण का व्यापक दर्शन है।
समारोह का समापन भगवान धन्वंतरि के प्रति श्रद्धा एवं आयुर्वेद के सिद्धांतों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र की सेवा करने के संकल्प के साथ हुआ।
धन्वंतरि जयंती का यह पावन अवसर सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों के जीवन में ज्ञान, संस्कार, सेवा और सफलता का नया अध्याय प्रारंभ करने वाला सिद्ध हुआ।













































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